काव्य संसार
Sunday, August 28, 2016
अकास भएर
कसरी रेखाँकन गरूँ म तिम्रो प्रेम ?
कहाँ कहाँ बाँधूँ बाँध ?
कता कता लगाऊँ सिमाना ?
मेरी प्रिय,
तिमी त अकास भएर मलाई छोप्दै छौ ।
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